सलाम
कोई मकसद ही न था इसके सिवा शब्बीर का
क़ोम को बेदार करना काम था शब्बीर का
हो गया वह हमसफर और हम नवा शब्बीर का
जिसने जाना जिसने समझा फलसफा शब्बीर का
दीन को कुफ्रे यज़ीदी से बचाने के लिए
कर्बला में खेमा ज़न था क़ाफला शब्बीर का
दुश्मने इस्लाम तो हरगिज़ बता सकते नहीं
हमसे पूछो हम बताएं मर्तबा शब्बीर का
जुल्म से टकराव तो लेकिन तशद्दुत के बगैर
अहले हक़ को खास यह पैग़ाम था शब्बीर का
खेमा इब्ने अली में हुर का आना मरहबा
उसको जन्नत मिल गई जो हो गया शब्बीर का
दिल में रह रह कर यही एक टीस उठती है फिग़ार
कातिलों से ले न पाया खून बहा शब्बीर का।
कोई मकसद ही न था इसके सिवा शब्बीर का
क़ोम को बेदार करना काम था शब्बीर का
हो गया वह हमसफर और हम नवा शब्बीर का
जिसने जाना जिसने समझा फलसफा शब्बीर का
दीन को कुफ्रे यज़ीदी से बचाने के लिए
कर्बला में खेमा ज़न था क़ाफला शब्बीर का
दुश्मने इस्लाम तो हरगिज़ बता सकते नहीं
हमसे पूछो हम बताएं मर्तबा शब्बीर का
जुल्म से टकराव तो लेकिन तशद्दुत के बगैर
अहले हक़ को खास यह पैग़ाम था शब्बीर का
खेमा इब्ने अली में हुर का आना मरहबा
उसको जन्नत मिल गई जो हो गया शब्बीर का
दिल में रह रह कर यही एक टीस उठती है फिग़ार
कातिलों से ले न पाया खून बहा शब्बीर का।
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