Saturday, October 26, 2019

अक़्से जमाल जो हक़ीक़त से नहीं आंख चुराने वाले अपनी तक़दीरहै खुद आप बनाने वाले

जो हक़ीक़त से नहीं आंख चुराने वाले
अपनी तक़दीरहै खुद आप बनाने वाले
खो गए जाने कहां राह दिखाने वाले
वह मुझे प्यार से समझाने समझाने वाले
तेरी जुल्फों की घनी छांव मुबारक तुझको
दिल की दुनिया में मेरी आग लगाने वाले
पर्दा नाज़ से एक बार तो देखा होता
मुझसे ज़ी होश को दीवाना बनाने वाले
तुझ पर हो साक़िये कोसर  की इनायत पेहम
प्यास कि आग मेरे दिल में लगाने वाले
आप तो बैठ गए तरके मोहब्बत करके
क्या बताऊंगा जो पूछेंगे जमाने वाले
तुम भी आ जाते हो क्यों  लोगों की बातों में फिग़ार
लोग तो होते हैं बे पर  की उड़ाने वाले ।।


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