अहलेबैत का मर्तबा
अल्लाह के नजदीक रसूल के अहलेबैत का मर्तबा क्या है? इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुरआने करीम में आयते ततहीर थे तभी पअहलेबैते रिसालत की पाक दामनी और उनकी पाकीज़गी का कसीदा पढ़ रही है। अहलेबैत की फजीलत को समझे बगैर किसी का ईमान कामिल होना मुमकिन ही नहीं है।
पैग़ंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो वाले वसलम इरशाद फरमाते हैं कि नमाज दीन का सुतून है और मेरे अहले पर से मोहब्बत दीन की बुनियाद है
अल्लाह के रसूल जब तबलीगे इस्लाम मुकम्मल कर चुके तो कुरान ए करीम में आयते मवद्दत नाजिल हुई। जिसका मतलब है कि ऐ मेरे मेहबूब कह दो अपनी उम्मत से के तुमको कलमा पढ़ने, तबलीगो-दावत देने, नमाज़, रोजा वगैरा की तालीम देने और ईमान की दौलत से मालामाल करने के बदले में तुमसे मालो दौलत नहीं मांगता अलबत्ता इसका अजृ(उजरत यानि कीमत)
अल्लाह के नजदीक रसूल के अहलेबैत का मर्तबा क्या है? इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुरआने करीम में आयते ततहीर थे तभी पअहलेबैते रिसालत की पाक दामनी और उनकी पाकीज़गी का कसीदा पढ़ रही है। अहलेबैत की फजीलत को समझे बगैर किसी का ईमान कामिल होना मुमकिन ही नहीं है।
पैग़ंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो वाले वसलम इरशाद फरमाते हैं कि नमाज दीन का सुतून है और मेरे अहले पर से मोहब्बत दीन की बुनियाद है
अल्लाह के रसूल जब तबलीगे इस्लाम मुकम्मल कर चुके तो कुरान ए करीम में आयते मवद्दत नाजिल हुई। जिसका मतलब है कि ऐ मेरे मेहबूब कह दो अपनी उम्मत से के तुमको कलमा पढ़ने, तबलीगो-दावत देने, नमाज़, रोजा वगैरा की तालीम देने और ईमान की दौलत से मालामाल करने के बदले में तुमसे मालो दौलत नहीं मांगता अलबत्ता इसका अजृ(उजरत यानि कीमत)
