मीनारह जमाल ए रिसालत हैं फातिमा
तारीकियों में शमा हिदायत हैं फातिमा
अल्लाह के रसूल पर रहमत हैं फातिमा
अरबाबे दीने हक़ पे इनायत हैं फातिमा
एवाने सबरो ज़ब्त की ज़ीनत हैं फातिमा
मुश्किल कुशा के हक़ में मसर्रत हैं फातिमा
संजीदगी से सोचें अगर ग़ोर से पढ़ें
लोहे जहां पे हक़ की इबारत हैं फातिमा
हैं पंजेतन की रुकन खदीजा की लाडली
पाकीज़गी में पेकरे अस्मत हैं फातिमा
कुलसुम और जेनब ओ हसनैन की है मां
जो सोचें तो साहिबे दौलत हैं फातिमा
अल्लाह के रसूल भी ताज़ीम करते हैं
ज़ी मर्तबत हैं साहिबे इज़्ज़त हैं फातिमा
वह सब की मोहतरम हैं और वह सब की अज़ीज़ हैं
बेशक फिग़ार रूहे मोहब्बत हैं फातिमा
मेरी नज़र में अज़मते इस्लाम हैं फिग़ार
दीने रसूले पाक की शौकत हैं फातिमा
(सतीश फिग़ार)
तारीकियों में शमा हिदायत हैं फातिमा
अल्लाह के रसूल पर रहमत हैं फातिमा
अरबाबे दीने हक़ पे इनायत हैं फातिमा
एवाने सबरो ज़ब्त की ज़ीनत हैं फातिमा
मुश्किल कुशा के हक़ में मसर्रत हैं फातिमा
संजीदगी से सोचें अगर ग़ोर से पढ़ें
लोहे जहां पे हक़ की इबारत हैं फातिमा
हैं पंजेतन की रुकन खदीजा की लाडली
पाकीज़गी में पेकरे अस्मत हैं फातिमा
कुलसुम और जेनब ओ हसनैन की है मां
जो सोचें तो साहिबे दौलत हैं फातिमा
अल्लाह के रसूल भी ताज़ीम करते हैं
ज़ी मर्तबत हैं साहिबे इज़्ज़त हैं फातिमा
वह सब की मोहतरम हैं और वह सब की अज़ीज़ हैं
बेशक फिग़ार रूहे मोहब्बत हैं फातिमा
मेरी नज़र में अज़मते इस्लाम हैं फिग़ार
दीने रसूले पाक की शौकत हैं फातिमा
(सतीश फिग़ार)
Nice
ReplyDeleteNice
ReplyDelete