अक्से जमाल
मेरी चश्मे शोक़ में जलवा गर
मेरी चश्मे शोक़ में जलवा गर
कभी दर तेरा कभी बाम है
मेरे दिल में तेरी ही याद है
मेरे लब पे तेरा ही नाम है
नहीं तुझ में मुझ में कोई बड़ा
के बराबरी का मुक़ाम है
तेरा हुस्न हुस्ने तमाम है
मेरा इश्क इश्क़े दुवाम है
मेरे साक़या दरे मय क़दा
तेरी मस्त आंखों का नाम है
मुझे प्यास दे के शराब दे
तुझे इख्तयार तमाम है
मेरा क्या है जो भी है तेरा है
ना सहर है मेरी न शाम है
तुझे इख्तयार तमाम है
मेरा क्या है जो भी है तेरा है
ना सहर है मेरी न शाम है
तेरी शौख नजरों के हाथ में
मेरी जिंदगी का निज़ाम है
कभी धूप है कभी छांव है
कभी सुबह है कभी शाम है
जिसे लोग कहते हैं जिंदगी
मेरी जान उसी का तो नाम है
यह फिग़ार खूब समझ ले तू
शहे अंबिया का कहा हुआ
जो हलाल है वह हलाल है
जो हराम है वह हराम है
जो सतीश तुझ को समझते हैं
जो फिगार तुझको हैं जानते
उन्हें शायद इसका पता नहीं
के यह मुस्तफा का गुलाम है
मेरी जिंदगी का निज़ाम है
कभी धूप है कभी छांव है
कभी सुबह है कभी शाम है
जिसे लोग कहते हैं जिंदगी
मेरी जान उसी का तो नाम है
यह फिग़ार खूब समझ ले तू
शहे अंबिया का कहा हुआ
जो हलाल है वह हलाल है
जो हराम है वह हराम है
जो सतीश तुझ को समझते हैं
जो फिगार तुझको हैं जानते
उन्हें शायद इसका पता नहीं
के यह मुस्तफा का गुलाम है

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