जो हक़ीक़त से नहीं आंख चुराने वाले
अपनी तक़दीर
है खुद आप बनाने वाले
खो गए जाने कहां राह दिखाने वाले
वह मुझे प्यार से समझाने समझाने वाले
तेरी जुल्फों की घनी छांव मुबारक तुझको
दिल की दुनिया में मेरी आग लगाने वाले
पर्दा नाज़ से एक बार तो देखा होता
मुझसे ज़ी होश को दीवाना बनाने वाले
तुझ पर हो साक़िये कोसर की इनायत पेहम
प्यास कि आग मेरे दिल में लगाने वाले
आप तो बैठ गए तरके मोहब्बत करके
क्या बताऊंगा जो पूछेंगे जमाने वाले
तुम भी आ जाते हो क्यों लोगों की बातों में फिग़ार
लोग तो होते हैं बे पर की उड़ाने वाले ।।
सोच ठंडे दिमाग से
मेरे यार मुझसे खफा ना हो
तुझे छू के जिस ने जगा दिया,
कहीं शोख़ दस्ते सबा ना हो
मेरे सजदा हाय खुलूस की, से
जो जज़ा हो उसके सिवा ना हो
मेरे दिल में दर्द उठे अगर
तेरा हाथ दिल से जुदा ना हो
जो मेरे नसीब में है लिखा
वह तो मिल ही जाएगा साक़िया
तू बराय लुत्फ वह जाम दे
मेरे हाथ में जो लिखा ना हो
मेरी तशनगी की तुझे क़सम
मेरे साक़ी वह न शराब दे
तेरी मस्ती जिसमें घुली ना हो
तेरा हुस्न जिसमें ढला ना हो
यह तेरी समझ में न आएगा
बड़ा उल्टा इसका हिसाब है
रहे इश्क में मेरे महत्सब
जो फना न हो तो बक़ा न हो
तेरे ग़म ही से है मुझे खुशी
है तेरा करम मेरी जिंदगी
तुझे है क़सम मेरी जान की
मेरी जान मुझसे खफा ना हो
मेरे दिल की धड़कने सुन न सुन
मगर अपने दिल की तो सुन कभी
जो फिग़ार दिल की पुकार है
वही तेरे दिल की सदा ना हो
यह तेरी निगाह का है कर्म
जो सतीश से मैं फिग़ार हूं
कोई जख्म ऐसा नहीं सनम
के जो तूने मुझको दिया ना हो
अपनी तक़दीर
है खुद आप बनाने वाले
खो गए जाने कहां राह दिखाने वाले
वह मुझे प्यार से समझाने समझाने वाले
तेरी जुल्फों की घनी छांव मुबारक तुझको
दिल की दुनिया में मेरी आग लगाने वाले
पर्दा नाज़ से एक बार तो देखा होता
मुझसे ज़ी होश को दीवाना बनाने वाले
तुझ पर हो साक़िये कोसर की इनायत पेहम
प्यास कि आग मेरे दिल में लगाने वाले
आप तो बैठ गए तरके मोहब्बत करके
क्या बताऊंगा जो पूछेंगे जमाने वाले
तुम भी आ जाते हो क्यों लोगों की बातों में फिग़ार
लोग तो होते हैं बे पर की उड़ाने वाले ।।
सोच ठंडे दिमाग से
मेरे यार मुझसे खफा ना हो
तुझे छू के जिस ने जगा दिया,
कहीं शोख़ दस्ते सबा ना हो
मेरे सजदा हाय खुलूस की, से
जो जज़ा हो उसके सिवा ना हो
मेरे दिल में दर्द उठे अगर
तेरा हाथ दिल से जुदा ना हो
जो मेरे नसीब में है लिखा
वह तो मिल ही जाएगा साक़िया
तू बराय लुत्फ वह जाम दे
मेरे हाथ में जो लिखा ना हो
मेरी तशनगी की तुझे क़सम
मेरे साक़ी वह न शराब दे
तेरी मस्ती जिसमें घुली ना हो
तेरा हुस्न जिसमें ढला ना हो
यह तेरी समझ में न आएगा
बड़ा उल्टा इसका हिसाब है
रहे इश्क में मेरे महत्सब
जो फना न हो तो बक़ा न हो
तेरे ग़म ही से है मुझे खुशी
है तेरा करम मेरी जिंदगी
तुझे है क़सम मेरी जान की
मेरी जान मुझसे खफा ना हो
मेरे दिल की धड़कने सुन न सुन
मगर अपने दिल की तो सुन कभी
जो फिग़ार दिल की पुकार है
वही तेरे दिल की सदा ना हो
यह तेरी निगाह का है कर्म
जो सतीश से मैं फिग़ार हूं
कोई जख्म ऐसा नहीं सनम
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